किशनगंज:- अखंड सौभाग्य का वर प्राप्त करने के लिए सुहागिन महिलाएं वट सावित्री का व्रत रखकर पूजा- अर्चना करती है। वट सावित्री व्रत की परंपरा काफी पौराणिक है। सत्यवान- सावित्री की कथा है, सावित्री ने अपने अल्पायु पति सत्यवान की मृत्यु के बाद यमराज के पीछे पीछे गई थीं। यमराज के द्वारा पूछे गए प्रश्नों का सटीक जवाब देकर उनसे पति के दीर्घायु होने का आशीर्वाद ले लिया था। वट वृक्ष के नीचे ही यमराज ने सत्यावान के प्राण वापस किए थे। इसी दिन से वट सावित्री पूजन की परंपरा पड़ी है। मान्यता है कि बरगद के पेड़ के जड़ में ब्रह्मा, तना में बिष्णु और पत्ते में शिव का वास होता है। जिलेभर में महिलाओं ने व्रत रखकर पूरे निष्ठा के साथ वट वृक्ष की पूजा अर्चना की।
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